गोल्ड लोन सोने के गहने या शुद्ध सोना जैसे ईंट आदि के बदले मिलता है। गोल्ड लोन सस्ता नहीं है। यह तभी लेना चाहिए जब आप निश्चित हों कि कर्ज की रकम भर सकते हैं। जरूरी नहीं है कि जिस सोने को गिरवी रखकर लोन लिया जा रहा है, उसे घोषित किया हो, पर अगर सोना और लोन ज्यादा हो तो आयकर वाले आपके पीछे पड़ सकते है। साथ ही अगर समय पर लोन न चुकाया जाए तो कम रकम के लिए आप महंगे गहनों को गंवा सकते हैं।
‘जब घर में पड़ा है सोना तो काहे का रोना।’ आजकल टीवी और रेडियो पर यह लुभावना विज्ञापन अक्सर सुनाई पड़ता है। इसे देखकर लगता है कि जब भी आपको रुपयों की जरूरत हो तो गोल्ड लोन लेना कितना आसान और साधारण माध्यम है। आप एकदम और कभी भी लोन ले सकते हैं। पर क्या वाकई गोल्ड लोन लेना अच्छा, आसान और सुरक्षित है?
आजकल अभिनेता अक्षय कुमार टीवी और रेडियो के विज्ञापनों में मन्नापुरम फाइनेंस के गोल्ड लोन के लिए यह जुमला कहते हुए नजर आते हैं। जिसे देकर लगता है कि लोन लेना कितना सरल है पर गोल्ड लोन जितना साधारण दिखता है कि बस अपने गोल्ड को गिरवी रखा और उसके बदले में आनुपातिक रूप में फाइनेंस कंपनी लोन दे देती है, यह उतना साधारण भी नहीं है। इसमें बहुत सारे जोखिम और कई कमियां हैं। गोल्ड लोन आपके सोने के गहने या शुद्ध सोना जैसे कि ईंट आदि को गिरवी रखकर दिया जाता है। और यह जरूरी नहीं है कि जिस सोने को आप गिरवी रखकर लोन लेने जा रहे हैं, उसे आपने घोषित किया हो, परंतु अगर सोना ज्यादा कीमत का हो और लोन भी ज्यादा हो तो आयकर महकमा बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से जानकारी लेकर आपके पीछे पड़ सकता है।
बहरहाल, गोल्ड लोन एक ऐसा उत्पाद है जो कि बहुत ही जल्दी आपको मिल जाता है। जल्दी से लोन मिलने का एकमात्र कारण है कि यह आपको सोने को गिरवी रखकर मिलता है। इसमें कर्ज लेने के लिए तमाम तरह की दूसरी औपचारिकताएं पूरी नहीं करनी पड़ती हैं। गोल्ड लोन की रकम सोने की मात्रा और शुद्धता के ऊपर निर्धारित की जाती है। लेकिन यहां पर सबसे बड़ी बात यह है कि गोल्ड लोन देने वाली संस्थाएं इस बात का ध्यान नहीं रखती हैं कि कर्ज लेने वाला कर्ज चुका भी पाएगा या नहीं?
सोने के मूल्यांकन के सभी कंपनियों के पैमाने अलग-अलग होते हैं, अगर आपका सोना हालमार्क है तो उसकी कीमत अच्छी आंकी जाएगी और आपको ज्यादा लोन मिल पाएगा। परंतु अगर सोना हालमार्क नहीं है तो आपको बहुत सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि आपके ज्यादा कीमत वाले सोने का मूल्यांकन बहुत ही कम किया जा सकता है और आपका सोना जो कि कीमत में बहुत ज्यादा है उसे कर्ज देने वाली संस्था गिरवी रख लेगी। गोल्ड लोन केवल सोने के गहनों के बदले ही मिल सकता है। अगर गहने में किसी प्रकार का कोई महंगा रत्न आदि जड़ा हुआ है तो उसकी कीमत नहीं आंकी जाती है, और गहने के तोल में रत्न आदि का भार कम कर दिया जाता है। मूल्यांकन केवल सोने का ही किया जाता है।
आपको लोन में कितनी रकम मिल सकती है यह उस सोने की मात्रा और शुद्धता पर निर्भर करता है, जो कि गिरवी रखा जाना है। कर्ज सोने के मूल्यांकन का 60 से 100 फीसद तक हो सकता है। यह सब तो ठीक है, परंतु यहां सोने के मूल्य के अनुपात में जिस पर लोन दिया जा रहा है, उसके लिए बाजार का अपना एक स्वाभाविक जोखिम है। जैसे कि बाजार में पिछले कुछ दिनों में देखने को मिला कि सोना कभी बहुत ज्यादा ऊपर पहुंच गया और फिर एकदम कम भाव पर आ गया। सोने के भाव में कमी होने पर कर्ज देने वाली कंपनी और कर्ज लेने वाला दोनों जोखिम में आ जाते हैं।
बाजार में आजकल यही सोचा जाता है कि सोने का भाव केवल ऊपर ही जाएगा जो कि बाजार और ऐसी संस्थाओं के लिए बहुत बड़ा जोखिम है। गोल्ड लोन की अवधि साधारणतया एक महीने से लेकर दो बरस तक की होती है और अगर आपको लोन की अवधि बढ़ानी है तो बढ़ा भी सकते हैं, परंतु उसके लिए ये संस्थाएं शुल्क के नाम पर कुछ अतिरिक्तपैसा आपकी जेब से निकाल लेती हैं।
गोल्ड लोन पर ब्याज दर 11 से लेकर 28 फीसद प्रति वर्ष तक हैं। ब्याज दर गोल्ड लोन की रकम पर निर्भर करती है, जितना सोना आपने गिरवी रखा है और उसके बदले में मिलने वाली रकम अगर ज्यादा होगी तो ब्याज ज्यादा ब्याज और रकम कम होगी तो ब्याज भी कम। साथ ही ब्याज की दर निर्भर करती है गोल्ड लोन के अनुपात पर, अगर अनुपात ज्यादा है तो ब्याज ज्यादा होगा और अगर कम अनुपात होगा तो ब्याज करीब 12 फीसद होगा। ज्यादा समय के लिए ज्यादा ब्याज देय होता है और कम समय के लिए कम ब्याज देय होता है। कर्ज देने वाली संस्थाओं और बैंकों को सुनिश्चित करना होता है कि सोना शुद्ध है और नकली नहीं है। अगर वे यह सुनिश्चित नहीं कर पाती हैं तो उनके लिए तो पूरा कर्ज ही घाटे का सदा बन जाता है।
ब्याज दर के अलावा अतिरिक्तशुल्क क्या है? कर्ज लेने वाले को इसका पता भी पहले ही लगा लेना चाहिए। अतिरिक्तशुल्क जैसे कि प्रोसेसिंग चार्जिज, समय के पहले कर्ज अदा करने पर शुल्क जो कि गोल्ड लोन के 0.5 से एक फीसद तक कुछ भी हो सकता है। फिर अगर लोन को रिन्यूवल करवाना है तो लोन की अवधि के अनुसार उसका भी अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। अगर इसी दौरान कर्ज लेने वाले को कुछ हो जाए तो कर्ज देने वाला उसके लिए बीमा करवाते हैं, जिससे लोन की रकम भरी जा सके और सोना कर्ज लेने वाले के परिवार को लौटा दिया जाता है। बीमे का शुल्क भी अतिरिक्त होता है।
गोल्ड लोन अधिकतर ईएमआई आधारित नहीं होता है। लोन की अवधि में कभी भी भुगतान किया जा सकता है। जैसे कि अगर एक वर्ष के लिए लोन लिया है तो आप एक वर्ष में उस लोन का भुगतान कभी भी कर सकते हैं। गोल्ड लोन में डिफाल्टर दर बहुत ही कम होती है। कर्ज लेने वाले तीस फीसद लोग तो उसी माह में लोन चुकता कर देते हैं। बाजार में गोल्ड लोन में डिफाल्टर दर दो फीसद से भी कम होती है। अगर कोई डिफाल्टर होता भी हैतो कर्जदाता कंपनी या बैंक गिरवी में रखा गया सोना या गहना बेचकर अपनी रकम वसूल कर लेते हैं। लेकिन गिरवी रखे गए सोने की नीलामी की प्रक्रिया बहुत लंबी है। गहने या सोने की नीलामी करने से पहले डिफाल्टर को रजिस्टर्ड पत्र भेजा जाता है, साथ ही उनसे बातचीत करके मामले को सुलझाने की कोशिश की जाती है, उन्हें कहा जाता है कि कम से कम ब्याज तो चुकाएं। फिर उन्हें कर्ज चुकाने के लिए और समय देने की कवायद शुरू की जाती है।
कुल मिलाकर गोल्ड लोन सस्ता लोन नहीं है। और आपकोगोल्ड लोन तभी लेना चाहिए जब आप निश्चित हों कि निश्चित समय के बाद आप कर्ज की रकम वापस भरकर गोल्ड लोन चुका सकते हैं। हां, और किसी लोन से यह लोन लेना बहुत ही सरल है और लोन जल्दी भी मिल जाता है और अगर समय पर लोन नहीं चुकाया जाता है तो आप अपने महंगे सोने के गहनों को कम रकम के लोन के चक्कर में गंवा सकते हैं।
Tuesday, June 21, 2011
गोल्ड लोन लेने से पहले
Posted by नीलम at 2:47 AM 6 comments
Labels: गोल्ड लोन, दर्श, नीलम अथर्व
Sunday, April 3, 2011
Wednesday, March 9, 2011
नई इबारत गढ़ती नाजुक उंगलियां
सफलता के नए आयाम स्थापित करती नए जमाने की नारी अपनी चिपरिचित अबला और बेचारी वाली छवि को तोड़ हर फील्ड में अपनी पस्थिति दर्ज करवा रही हैं। अब तो आलम यह है कि पुरुषों के तथाकथित पौरूष प्रदर्शन की फील्ड में भी महिलाओं का दबदबा बढ़ा है। महिलाओं की इसी सफलता को सलाम-
पढ़-लिख कर क्या करना है, आगे चलकर तो घर ही संभालना है, शादी करो और बच्चे पालो यह कुछ ऐसे जुमले हैं जो कुछ समय पहले तक लगभग हर लड़की को कभी न कभी सुनने पड़ते थे। लेकिन आज अपनी पुरानी छवि को तोड़ भारतीय महिलाएं घर की चारदीवारी से निकल कर खुले आसमां में उड़ान भर रही हैं। कई ऐसे क्षेत्र जहां पहले महिलाओं के होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, वहां कामयाब होकर उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा है। आज महिलाओं ने बतौर सैनिक, सिक्योरिटी गार्ड, स्टेशन कंट्रोलर, ट्रेन ड्राइवर, कैब ड्राइवर आदि काम करके लोगों चौकाया है। कहना गलत न होगा कि पिछले कुछ सालों में महिलाएं और अधिक सशक्त हो कर उभरी हैं।
आसमान नापतीं पायलट
कुछ वर्ष पहले तक इस चुनौतीपूर्ण प्रोफेशन को कम ही महिलाएं अपनाती थीं, लेकिन अब एयरलाइंस की बढ़ती संख्या और करियर की संभावनाओं को देखते हुए यह महिलाओं के लिए पसंदीदा क्षेत्र बन कर उभरा है। यही कारण है कि महिलाओं के कदम अब आसमान में भी बढऩे लगे हैं। उनके इन बढ़ते कदमों का हौसला तब और बढ़ गया जब भारत की सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में पहली बार दो महिला विमान चालकों को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। सब लेफ्टिनेंट सीमा रानी शर्मा तथा अम्बिका हुड्डा को 'विंग्सÓ प्रदान किए गए हैं। नौसैनिक विमानन के 56 वर्ष के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब महिला अधिकारियों को मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के बेड़े में पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल किया गया है।
ट्रेन की ड्राइविंग सीट का सफर
कुछ साल पहले तक शायद ही कोई इस बात की कल्पना भी कर सकता था कि कोई महिला ट्रेन की ड्राइविंग सीट पर भी सवार हो सकती है लेकिन सन 2000 में एक्सप्रेस ट्रेन की ड्राइविंग सीट पर बैठने वाली सुरेखा यादव ने कामयाबी का जो रास्ता दिखाया आज उसपर महिलाएं ट्रेन की गति से ही दौड़ती नजर आ रही हैं। सुरेखा के बाद पश्चिम रेलवे की पहली महिला ड्राइवर प्रीति कुमारी, लखनऊ इंडियन रेलवे लोकोमोशन की पहली ट्रेन ड्राइवर शमता, नॉर्थ रेलवे की पहली महिला इंजन ड्राइवर लक्ष्मी, झारखंड की पहली महिला लोको पायलट दीपाली आदि ऐसे नाम है जो पुरुषों के एकाधिकार वाले इस क्षेत्र में उनको चुनौती दे रही हैं और आने वाली पीढ़ी को पे्ररणा भी। अब तो अत्याधुनिक दिल्ली मेट्रो की ड्राइविंग ग्रुप में भी कुछ लड़कियों को शामिल किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि महिलाएं इस क्षेत्र में भी तरक्की की राह पर चलने लगी हैं।
फिल्म निर्माण एवं निर्देशन
भारतीय महिला डायरेक्टर्स पुरुष डायरेक्टरों से हर मायने में काफी आगे दिखती हैं। इसका सबूत है नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और फिल्म फेयर अवॉर्ड्स जिनको वे दशकों से अपने नाम करती आ रही हैं। अवार्ड पाने वाली महिला निर्देशकों की लंबी कतार है जो अपना रास्ता खुद बना रही हैं। कथा, चश्मे बद्दूर, स्पर्श और दिशा जैसी फिल्में बनाने वालीं सई परांजपे, बांग्ला फिल्मों की चर्चित अभिनेत्री, स्क्रिप्ट राइटर और फिल्मकार अपर्णा सेन, सलाम बॉम्बे के लिए विदेशों में तमाम अवॉर्ड जीतने वाली मीरा नायर, मलयालम फिल्मों की हीरोइन रच चुकीं रेवती सहित कल्पना लाजमी, दीपा मेहता, तनूजा चंद्रा, किरण राव आदि चंद वह नाम हैं जिन्होंने डायरेक्शन की फील्ड में भी अपना कमाल दिखाया है।
कॉरपोरेट और फाइनेंस में मिली कामयाबी
पहले जहां कारपोरेट और फाइनेंस की फील्ड्स को पुरुषों के एकाधिकार वाला क्षेत्र माना जाता था, वहीं अब महिलाओं ने अपनी मेहनत से न सिर्फ अपना स्थान बनाया है बल्कि अपनी उपयोगिता को भी साबित किया है। यही वजह है कि पिछले एक दशक में इन फील्ड्स में महिलाओं की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है और उन्होंने बड़े पदों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। इसका उदाहरण है आईसीआईसीआई बैंक की हेड चंदा कोचर, बायोकॉन लि. की चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मजुमदार शॉ, ब्रिटानिया की एमडी विनीता बाली, रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर उषा थरोट, श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की प्रेसिडेंट ज्योति नाइक, एसोचैम की प्रेजिडेंट स्वाति पीरामल, काइनेटिक फाइनेंस की मैनेजिंग डायरेक्टर सुलाजा फिलाडिआ मोटवानी और एचएसबीसी इंडिया की सीईओ नैना लाल किदवई आदि जिनकी सफलता ने कॉरपोरेट और फाइनेंस फील्ड में महिलाओं को नई राह दिखाई है। आज आलम यह है कि तमाम कॉरपोरेट कंपनियों में उच्च पदों पर बैठी महिलाएं अपनी सफलता की कहानी खुद कह रही हैं। भले ही पुरुषों को उनकी सफलता को पचाने में थोड़ा वक्त लग रहा है, लेकिन महिलाओं की सफलता की यह यात्रा निरंतर जारी है।
मिसाइल व परमाणु प्रोजेक्ट
स्पेस पर जाने वाली कल्पना चावला व सुनीता विलियम्स् से तो हम भलीभांति परिचित हैं। पर इनके अलावा भी ऐसी कई भारतीय मूल की महिलाएं है जो अंतरिक्ष संबंधि कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। इन्हींमें एक टेसी थॉमस पहली भारतीय महिला हैं, जो देश की मिसाइल प्रोजेक्ट (डिआरडिओ में) को हैंडिल कर रही थीं। टेसी को मिसाइल वूमेन के नाम से पहचाना जाता है। टेसी उन भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो देश के मिसाइल प्रोजेक्ट में काम करने की इच्छा रखती हैं। अग्नि-2 मिसाइल प्रोजेक्ट की हेड रही टेसी को अग्नि-5 मिसाइल प्रोजेक्ट की कमान भी सौंपी गई है। टेसी के अलावा भी कई भारतीय मूल की महिलाएं नासा के अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी हुई हैं जो समय-समय पर अपने प्रयोगों में उन्हें भागीदार बनाता रहता है।
मोर्चा संभालती नाजुक कलाईयां
पिछले साल जारी किए आंकड़ों के मुताबिक इंडियन फोर्सेज में करीब 2000 लेडी ऑफिसर्स काम कर रही थीं। करीब दो दशक पहले जब पहली बार इंडियन आर्म्ड फोर्सेज में महिलाओं से नौकरी के लिए आवेदन मांगा था, तो माना यह जा रहा था कि शायद ही कोई लड़की यह जॉब चुनेगी। लेकिन उम्मीद से कहीं ज्यादा आईं ऐप्लिकेशंस ने सबकी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। सेना में चुनी गईं महिलाओं ने बेहतरीन परफॉर्मेंस से अपने चयन को सही साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह उनकी मेहनत ही है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय सेना के तीनों अंगों में महिलाओं को पर्मानेंट कमीशन यानी पक्की और पूरी नौकरी देने का फैसला किया। इसके तहत अब महिलाओं को भी पुरुषों की तरह पांच साल बाद स्थायी कमीशन, पेंशन और दूसरी सुविधाएं मिलेंगी। मोर्चे पर महिलाओं की सफलता का एक और इतिहास तब बना जब पिछले दिनों बीएसएफ ने अपनी वुमन विंग को बॉर्डर पर भी तैनात किया है। घर संभालने वाली नाजुक कलाइयां आज दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दे रही हैं।
आईटी में बढ़ा अट्रेक्शन
अगर नए जमाने की नई नौकरियों की बात करें, तो महिलाओं को आईटी फील्ड ने सबसे ज्यादा अट्रैक्ट किया है। देखा जाए तो पिछले एक दशक में आईटी ने भारतीय युवाओं को रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में लड़कियों ने भी इस मौके को हाथोंहाथ लिया और इस फील्ड में अपनी अलग पहचान बनाई। नैसकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल आईटी सेक्टर में करीब 25 पर्सेंट महिलाएं काम कर रही हैं जिनमें से 8 पर्सेंट आईटी कंपनियों में टॉप पोजिशन पर हैं। महिलाओं ने आईटी फील्ड में सबसे ज्यादा तरक्की की है और एक हालिया रिपोर्ट की माने तो यह संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है।
मनपसंद काम है हॉस्पिटैलिटी का
एयरलाइंस और फाइव स्टार होटलों की संख्या में दिनोंदिन होती बढ़ोतरी की वजह से महिलाओं के लिए लगातार रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी हो रही है। महिलाएं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के नए चेहरे के रूप में सामने आई हैं। महिलाओं के ज्यादा केयरिंग होने की वजह से इस सेक्टर ने महिलाओं को हाथोंहाथ लिया है। इससे महिलाएं पहले के मुकाबले ज्यादा आत्मनिर्भर हो गई हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ने महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और अच्छी सैलरी पर काम करने का मौका उपलब्ध कराया है।
सफलता के इन पड़ावों पर परचम लहराने के बावजूद अभी भी कई ऐसे पद हैं जिन पर महिलाएं फिलहाल आसीन नहीं हुई हैं। जैसे स्थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के तीनों अंगों के सर्वोच्च पद, फाइटर पायलट, नौ सेना में युद्ध पोत चालक, चुनाव आयुक्त, केबिनेट सेक्रेटरी और योजना आयोग की उपाध्यक्ष,, भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश, रॉ, आईबी और सीबीआई जैसी सरकारी खुफिया एजेंसियों के शीर्ष पद व इसरो और इयूका जैसे प्रमुख वैज्ञानिक केंद्रों के उच्च पदों को महिलाओं का अभी भी इंतजार है। इनपर अभी तक कोई महिला आसीन नहीं हुई है। इनमें से कुछ पदों से दूरी का कारण वर्तमान नियम हैं, जो शारीरिक और मानसिक योग्यता के आधार पर महिलाओं को उन भूमिकाओं को निभाने से रोकते हैं तो कई पदों का खाली होना महिला विकास की धीमी प्रगति और देर से शुरु हुई प्रक्रिया से जुड़ा है। आशा है कि कदम दर कदम कामयाबी हासिल करने वाले कदमों से यह दूरी भी जल्द ही नप जाएगी।
Posted by नीलम at 1:36 AM 0 comments
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